मुंबई माया नगरी शुरू से ही देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। इस नगरी में पुरे देश से नौजवान फ़िल्मी पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का सपना लेकर जाते हैं। इनकी तादाद हजारों नहीं लाखों में भी हो सकती हैं लेकिन इस भीड़ में से कुछ गिनती के लोग ही अपना सपना साकार कर पाते हैं। इन सौभाग्यशाली युवाओं में से एक नाम हम गौरव वासुदेव का भी ले सकते हैं जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की है और अपनी अभिनय कला को निखारने के लिए घोर तप भी किया। बेशक वह छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो चुके हैं मगर वो कहते हैं कि उनकी मंजिल अभी दूर है और उसको पाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।गत दिनों गौरव वासुदेव के साथ सजग वार्ता डॉट कॉम की ओर से अश्विनी भाटिया की हुयी एक मुलाकत में उनके जीवन से जुडी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। यहां उसी बातचीत के आधार पर लिखित यह रिपोर्ट प्रस्तुत है ;
पंजाब की सांस्कृतिक राजधानी माने जानेवाले जालंधर में सन 1987 को एक साधारण परिवार में जन्में गौरव वासुदेव कहते हैं कि जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उन्होंने तभी से ही अभिनय के क्षेत्र में काम करने की इच्छा मन में पाल ली थी जो वक्त के साथ -साथ और प्रबल होती चली गयी। वह कहते हैं कि उनके परिवार से कोई भी सदस्य पहले इस क्षेत्र में नहीं रहा।2008 में कॉलेज में पढ़ते हुए वह थियेटर से जुड़ गए और यह जुड़ाव ही उनकी अभिनय की दुनिया में आने का प्रवेश द्धार बना।