



आजादी के उपरांत प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता बताना कहां तक सही है ?क्या हमें इस बात का जवाब नहीं मिलना चाहिय कि भारत का बंटवारा करने के लिए जिन्ना के साथ -2 नेहरू भी बराबर के दोषी क्यों नहीं थे ? देश को आज़ादी के साथ बंटवारे का गहरा जख्म देने के जिम्मेदार लोग आधुनिक भारत के निर्माता कैसे हो सकते हैं ? पंजाब और बंगाल की बर्बादी के लिए क्या हम नेहरू को दोषी ठहरा सकते हैं ? क्या 1947 को टूटने से नहीं बचाया जा सकता था अगर यह आवश्यक हो गया था तो पाकिस्तान का एक छोर पश्चिम और दूसरा छोर पूर्व में बनाने के पीछे बंटवारे में लगे नेताओं की किस सोच का परिणाम था ? क्या यह पंजाबियों और बंगालियों को विभाजित करके आज़ाद भारत में कमज़ोर बनाने की सोची -समझी रणनीति का हिस्सा नहीं माना जा सकता ? बंटवारे के उपरांत भी पंजाब को तीन टुकड़ों में बाँटना और उत्तरप्रदेश जैसे विशाल भूभाग और आबादी वाले राज्य को एकजुट बनाये रखने के पीछे नेहरू और कांग्रेस की कौनसी रणनीति थी ? पंजाब को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद भी नेहरू के बाद उनकी सपुत्री इन्द्रा गांधी और कांग्रेस ने पंजाब के एक ही माँ की 2 संतानो -हिन्दू -सिखों को एक दूसरे के खिलाफ शत्रु बनाकर खड़ा करने की कोई कोर -कसर बाकि नहीं छोड़ी। क्या यह नेहरू का पंजाबियों के प्रति कौन सा स्नेहपूर्ण रवैय्या था, जिसे उनकी मौत के बाद भी उनकी सपुत्री और उनकी प्यारी पार्टी कांग्रेस ने भी नहीं छोड़ा ?पार्टिशन के दौरान लगी साम्प्रदायिक आग ने लगभग 10 लाख अभागे हिन्दू -मुस्लिमों की जिंदगी को लील लिया था और करोड़ों लोगों को देश की अपना घर -बाहर छोड़ कर अपने ही देश में शरणार्थी बनकर आजादी की कीमत चुकाने को विवश कर देने वाले आदरणीय जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस कैसे आधुनिक भारत की निर्माता है? इस बात का जवाब क्या सोनिया गांधी और उनके सपुत्र राहुल गांधी या उनकी चारण मण्डली के पास है ?क्या कश्मीर के एक तिहाई भाग पर पाकिस्तान के अधिपत्य में 1948 में चले जाने और बाकी बचे कश्मीर को आज तक नासूर बनाने के लिए पंडित नेहरू की वैज्ञानिक सोच और नीतियों का परिणाम नहीं है ? सन 1962 में चीन के हाथों भारत को बुरी तरह से लहूलुहान करवाने और तिब्बत जैसे एक बड़े भूभाग पर चीन के अधिपत्य को स्वीकार करनेवाले नेहरू किस तरह से आधुनिक भारत के निर्माता हैं ,इसका जवाब कौन देगा ? भारत के एक तिहाई भूभाग पर पाकिस्तान रूपी इस्लामिक देश जो आतंकवाद का जनक है और पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चूका है ,ऐसे दानव को अस्तित्व में लानेवाले लोग चाहे वो नेहरू हो ,जिन्ना हो, अँगरेज़ हों या फिर देश को आज़ादी दिलाने का दम्भ भरनेवाली कांग्रेस न तो भारत के न ही दुनिया के और न ही मानवता के हितैषी हो सकते हैं ?
विश्व के महान दार्शनिक , कुशल रणनीतिकार ,कुटनीतिज्ञ ,अन्याय के विरुद्ध महाभारत के शंखनाद करनेवाले और मानवजाति को अपने कल्याण की राह बताने वाले पवित्र ग्रंथ गीता के रचियता भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिवस 'श्री कृष्ण जन्माष्टमी ' पर हमारी ओर से सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।आज इस अवसर पर हमें भगवन श्री कृष्ण की इस नीति को कि ''अन्याय और अधर्म पर चलनेवालों को समाप्त करने के लिए चाहे हमें साम -दाम -दंड -भेद किसी भी नीति को अपनाना पड़े अपनाना ही धर्म है।'' इस अवसर पर इस बात पर विचार करना भी आवशयक समझता हूँ कि क्या हमने विशेषतौर से हिन्दुओं ने कभी अपने अवतारों राम -कृषण की पूजा करने के अलावा उनकी दिखाई गई राह पर चलने और उनके द्वारा दिए गए सन्देश को अपने जीवन में उतारने की कौशिश की है ? विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता और अपनी धर्म -संस्कृति की पूंजी की विरासत के स्वामी होने के बावजूद आज दुनिया में हमारी पहचान सबसे कायर और डरपोक धर्म के अनुयायिओं की क्यों बनी हुयी है ? इसका कारण यह है कि जबसे हमने अन्याय और अधर्म को सहने की आदत बना ली है और संकट के समय लड़ने की बजाय भगवान से चमत्कार की आस लगाने की प्रवृति को अपने मन -मस्तिष्क में बैठा लिया है तबसे हमारी हालत दयनीय और कमजोर धर्म अनुयायिओं की बन गई है। एक बात और,शायद हमारे भगवानों ने भी यह समझ लिया है कि उनके भक्त अब विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की बजाय चमत्कारों की आस करने लगे हैं ,इसीलिए उन्होंने हमारी मदद करनी भी बंद कर दी है।यह बात हमें समझ में क्यों नहीं आ रही कि 'दुनिया में सिर्फ ताकतवर के कुत्तों की भी पूजा होती है और कायरों का देवता भी अपमानित होता है।' हमने अपने अवतारों की पूजा तो की परन्तु उन पर विश्वास नहीं किया। इसका प्रमाण हिन्दुओं का बड़ी संख्या में कब्रों -मज़ारों पर माथा रगड़ना की होड़ और मुल्ला -मौलविओं ,पाखंडी बाबाओं और ज्योतिषों के चक्कर में पड़कर अपनी दुविधाओं से मुक्ति का मार्ग ढूंढ़ना। यही है हिन्दुओं की बिगड़ती और कमजोर होती स्थिति का असली कारण। हमने अपने अवतारों को पूजने में ही अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ली और उनके बताये रास्तों पर चलने से तौबा कर ली क्यों ?क्या हमारे अवतारों ने अपने काल में अधर्मियों और अत्याचारियों के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठाये और उनका समूल नामोनिशान धरती से नहीं मिटा दिया। हमने अपने इन अवतारों को इसी कारण भगवान माना और उनकी मूर्तियां बनाकर मन्दिरों में स्थापित करके पूजना तो शुरू कर दिया और अपने सभी संकटों से बचने का भार उनपर डाल कर अपने को सुरक्षित मान लिया।जिस कारण हमने इन अवतारों को भगवान माना भूलवश उसी कारण को अनदेखा कर दिया और यहीं से हम अपनी राह से ऐसे भटके कि 1000 साल गुलाम रहने के उपरांत भी आज भी सही राह नहीं ढूंढ सके। हमने विपरीत परिस्थितियों में अपने दुश्मनों से लड़ने की बजाय अपने देवताओं की मूर्तियों के आगे गिड़गिड़ाना सीख लिया और हमेशा ही हारते रहे।हमने भगवान से अपनी रक्षा की गुहार की और चमत्कार करने का आह्वान किया और खुद उठकर लड़ने की हिम्मत न करके अपने अवतारों के कर्म करने के सन्देश को भूल कर अपने को पराजय के हवाले कर दिया। हमें धार्मिक शिक्षा देनेवाले धर्माचार्यों ने भी हमें सिर्फ रासलीला और बंसी की तान सुनने तक सिमित कर दिया।हमारे धर्माचार्यों और कथावाचकों ने हमें कुरुक्षेत्र में महाभारत के दौरान निराश हताश हो चुके अर्जुन को अधर्म -अन्याय के विरुद्ध हथियार उठाकर लड़ने का आह्वान करनेवाले श्री कृष्ण से मिलने ही नहीं दिया , इसी धार्मिक - शिक्षा की वजह से यह गौरवशाली और शक्तिशाली खुद को राम- कृष्ण की संतान माननेवाली हिन्दू जाति एक हज़ार साल तक मुट्ठी भर विदेशी और लुटेरे आक्रान्ताओं की गुलाम बन कर अपमानित होकर,जीने को विवश हो गयी। हमने भी अपने अवतारों के जीवन चरित्र से अन्याय और राक्षसी शक्तियों से लड़ने की प्रवृति को छोड़कर सिर्फ रासलीला और रामलीला देखने तक सिमित करके अपने भगवानों को भी शर्मशार ही किया है। हमने अहिंसा और उदारता का जो आवरण ओढ़ रखा है क्या वो हमारी कायरता और लड़ने से बचने की प्रवति को छुपाने की कौशिश मात्र नहीं है ? सिर्फ भगवान श्री कृष्ण की पूजा करके और उसके जन्मदिवस पर मंदिरों को सजाकर क्या हम उनके [श्री कृष्ण ]द्वारा अपने पवित्र गीता ग्रंथ के रूप में दिए गए कर्म के सन्देश को न मानकर अपने भगवान का अपमान नहीं कर रहे ? अपने अवतारों को पूजने की बजाय हमें उनके दिखाए रास्ते पर चलने से संकोच क्यों है ? आज हमारेराष्ट्र और संस्कृति के सामने जो भी समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं उन सब का एक ही उपाय है और वह यह है कि हम श्री कृष्ण की बताई राह को अपना लें। इसको अपनाने से ही मानवता और राष्ट्र -धर्म की रक्षा तो होगी ही साथ ही साथ आतंकवादी ताकतों का भी समूल नाश इस धरती से हो जायेगा। जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर हम अगर इस उपरोक्त उपाय को मैंने का प्रण कर लें तो इससे बढ़कर कोई कृष्ण -भक्ति नहीं हो सकती। जय श्री कृष्ण। ![]() |
| Hakumat panewalon ki lalsa ka shikar krodo log jinhe aazadi ki kimat ke liye apne ghr -bahr chhoaudkar anjan rahon prnikalne ko mazboor kar diya gya |
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| Vo Badnaseeb jo aazadi ki saudebazi ke karan mare gaye |
रक्षा बंधन हर वर्ष आता है और हम अपनी बहनों से रक्षा सूत्र अपने हाथ में बंधवाकर उसकी रक्षा करने का वचन उसको देते हैं। हमारे इस वचन से हमारी बहन को भी यह विश्वास हो जाता है कि समाज में कोई ऐसा है जो उसको मुसीबत के समय में उसकी पुकार को सुनकर अवश्य उसकी मदद को दौड़ा - २ आ जायेगा। इसी विश्वास को कायम रखने का संकट आज उठ खड़ा हुआ है। आज हमारी बहन -बेटियों की आबरू खतरे में है और हम सिर्फ रक्षाबंधन की औपचारिकता को पूरा करने में लगे हुए हैं। क्या हमें इस पवित्र त्यौहार की मूल भावना को समझते हुए अपनी बहन -बेटियों को दिए वचन को पूरा करने के लिए नहीं सोचना चाहिय ? अगर ऐसा कर पते हैं तो इस त्यौहार और हाथ में बहन से बँधवानेवाले रक्षा - सूत्र की महत्ता है अन्यथा यह एक औपचारिकता मात्र है। | द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मृति |

कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के यात्रिओं के लिए बालटाल पर लगाये गए लंगर शिविरों पर ईमानवालों ने हमला करके एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी दूसरे धर्म के लोगों को कतई सहन नहीं कर सकते, क्योंकि उनका मजहब उन्हें ऐसी ही शिक्षा देता है। लंगर लगाने वाले सभी लोग हिन्दू हैं और देश के कोने -२ से अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रीओं के रहने और खाने का प्रबंध करते हैं। एक तो हिन्दुओं को अपने तीर्थ पर जाने के लिए जम्मू -कश्मीर की सरकार कोई सुविधा नहीं देती दूसरे जब लोग अपना प्रबंध खुद करते हैं तो उनकी सुरक्षा में कौताही बरत कर उनकी यात्रा को बाधित करने की छूट अलगाववादी मुस्लिम संगठनों को देती है। इसका सीधा - २ यही सन्देश है कि किसी भी तरह से हिन्दुओं की अमरनाथ यात्रा को न होने दिया जाये। 18 जुलाई को जो उत्पात ,हिंसा और आगजनी हिन्दुओं के लंगर शिविरों में की गई ,उससे यह बात तो पूरी तरह से साबित हो रही है कि मुस्लिम कटटरपंथी अब कानून को कुछ भी नहीं समझते हैं। अफ़सोस की बात है की भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में जहां हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद अलपसंख्यक मुसलमानों की दादागिरी का शिकार है और अधिकांश राजनैतिक दल भी इस आतंक को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। गाज़ा में इजराइल के साथ फलस्तीन के युद्ध में मारे जानेवाले लोगों की कांग्रेस और अन्य कई राजनैतिक दलों के लोगों द्वारा को अधिक चिंता है परन्तु अपने ही देश में हिन्दुओं की तीर्थयात्रिओं पर होनेवाले हमलों से उनका दूर - २ तक वास्ता नहीं है ,क्यों ?![]() |
बांग्लादेश में हिंदुओं पर मुसलमानों की दरिंदगी |
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| हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेशी मुसलमानों की हिंसा |
Kya Punjab mein aatankwad ke dauran mare gaye nirdosh Hunduon ke katilon ko sza nahi honi chahiy ? Kya es daur mein huye katl -E-Aam ki janchSIT se karwane ki mang koi party karegi ya koi bhi sarkar chahe vo Punjab ki Akali-Bjp sarkar ho ya kender ki Upa sarkar Hinduon ko insaf dilane ki aor koi kadam uthayegi? Kya Hinduon ke hit ki bat karnewale RSS ke log begunah Hinduon ko ensaf dilane ka abhiyan chalayenge ? Kya Punjab Ke Aatankwad mein mare gaye begunah Hinduon ke pariwaron ko ensaf nahi milna chahiy ? Punjab aur Bharat ki sarkar jwab de ?Danga khin bhi ho yh manvta ke virudh jaghany apradh hai .Dange kabhi bhi sahi nahi ho sakte . 1984 mein sikh virodhi dange galat the aur in dangon ki janch ke liye kai aayog bhi bane .En dango mein tatkalin congress sarkar jimmedar thi .En dangon ki punh SIT janch hone ki sambhavna hai aur eska hum swagat karte han .Ek bat aur yh hai ki Punjab aur desh ke any esthano par khalistani aatankwadiyon ne badhi sankhya mein begunah Hinduon ka katl -E -Aam kiya aur bomb blast karke masum logon ka lahu bhaya .Asankhy Hindu aatankwadiyon ki krurta aur hinsa ka shikar bnaye gaye ,unko loota gya aur maut ke ghat utar diya gya . kai ablaon ki ezzat ko bhi loota gya .Punjab mein hinsa ka kai sal tak nanga nach huya , afsos hai ki kisi bhi political party ne kbhi unnirdosh Hinduon ke kation ko sza dene , koi aayog bnane aur aatankwad ka shikar Hinduon ko insaf dilane ki mang ya aawaz nahi utthai kyon ? Kya es bat ka jwab Hindu Dharm ke kathit hiteaishi sangathan aur netaon ke pas hai ?
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-
'नेताजी' के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को 'आज़ाद हिन्द सरकार' की स्थापना की तथा 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुँचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" दिया। 18 अगस्त 1945 को तोक्यो जाते समय ताइवान के पास नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में हो गई, लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया। नेताजी की मौत के कारणों पर आज भी विवाद बना हुआ है।आज़ाद भारत कि सरकारों ने नेताजी के नाइंसाफी की है। उनके द्वारा भारत माँ की जो सेवा की गई है वह अतुलनीय है और उनकी आज़ादी की लड़ाई में योगदान को कांग्रेस ने जानबूझ कर वह महत्व नहीं दिया जिसके वो हक़दार है। अगर भारत को आज़ादी नेताजी के नेतृत्व में मिलती तो भारत आज दुनिया के नक़्शे में दूसरी तस्वीर होती और दुनिया का नक्शा भी कुछ और ही होता।जो राष्ट्र अपने महानायकों को भूल जाता है न तो दुनिया में उसको सम्मान मिलता है और न ही उसका अस्तित्व अधिक दिन तक बचा रह सकता है। हम आज अपने राष्ट्र के महानायक नेताजी की जयंती पर उनके चरणों में अपना शत -शत नमन करते और उनकी नीतियों पर चलकर अपने राष्ट्र की रक्षा और सेवा का संकल्प लेते हैं।- जय हिन्द।
भारत के इतिहास में ऐसी असंख्य वीर -वीरांगनायों के नाम अंकित हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। इन महान बलिदानियों में महाराणा प्रताप का नाम सबसे महतवपूर्ण है जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म की रक्षा के लिए राजसी ठाठ -बाट त्यागकर जंगलों की खाक छानकर भी हार नहीं मानी और अपनी पूरी ताकत विदेशी मुगलों की सत्ता को उखाड़ने में लगा दी। प्रताप ने मुग़ल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार करने की बजाय रणभूमि में लड़ने का रास्ता स्वीकार किया। धन्य है ऐसी वीरांगना जिसने ऐसे वीर पुत्र को जना ,हम सदैव उसके आभारी रहेंगे। आज देश में ऐसे लोगों और नेतायों की कमी नहीं है जो सत्ता के लिए देश -धर्म के विरुद्ध जाकर भी अपने स्वाभिमान और अस्तित्व का सौदा करने से भी बाज नहीं आ रहे ,लानत है ऐसे लोगों पर। आज फिर ऐसा वातावरण बनता जा रहा है जिसमे भारत के स्वाभिमान को देश के अंदर और बाहर से गम्भीर चुनौती दी जा रही है और शासक वर्ग ऐसी ताकतों से निपटने की बजाय उनके आगे पुरे राष्ट्र के गौरव को धूमिल करने में तनिक भी शर्म महसूस नहीं कर रहा। अब फिर वो समय आ गया है जिसमें हमारी मातृभूमि अपने सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपनी संतान को पुकार रही है। आओ आज हम महाराणा प्रताप जैसे वीर बलिदानी की पुण्य तिथि पर शपथ लें कि हम भारत माँ की पुकार को अनसुना नहीं करेंगे और उसके स्वाभिमान को रौंदने वाली राष्ट्र और धर्म विरोधी शक्तियों को आगामी लोकसभा चुनाव में समूल उखाड़ कर दम लेंगे। यही शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
महाराणा प्रताप (९ मई, १५४०- १९ जनवरी, १५९७) उदयपुर, मेवाड में सिसोदिया दिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने कई वर्षों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। इनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कँवर के घर हुआ था। १५७६ के हल्दीघाटी युद्ध में २०,००० राजपूतों को साथ लेकर राणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के ८०,००० की सेना का सामना किया। शत्रुसेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को शक्ति सिंह ने बचाया। उनके प्रिय अश्व चेतक की भी मृत्यु हुई। यह युद्ध तो केवल एक दिन चला परन्तु इसमें १७,००० लोग मारे गएँ। मेवाड़ को जीतने के लिये अकबर ने सभी प्रयासकिये। महाराणा की हालत दिन-प्रतिदिनचिंतीत हुइ। २५,००० राजपूतों को १२ साल तक चले उतना अनुदान देकर भामाशाह भी अमर हुआ।
आप पार्टी के दिल्ली के लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने अपनी ही पार्टी के कथित ईमानदार नेतायों को बेनकाब कर दिया है। उनका आरोप है कि पार्टी के नेता दिल्ली की जनता से किये वायदों को पूरा करने की बजाय लोकसभा के चुनाव में जुट गए हैं। बिन्नी ने केजरीवाल को तानशाह बताते हुए कहा कि आप पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री कांग्रेस से सांठ -गांठ करके दिल्ली की जनता से धोखा कर रहे हैं। बिन्नी का कहना है यह भी है कि पार्टी जनता को गुमराह कर रही है और पार्टी के सारे फेंसले सिर्फ ४ लोगों की मण्डली कर रही है क्या आप का यही सवराज है ?
आनेवाले दिनों में कुछ परिवर्तन कांग्रेस और सरकार में देखने को मिल सकते हैं। राहुल गांधी को जनता ने बुरी तरह से खदेड़ दिया है और उनकी किसी भी बात को मानना तो दूर सुनना भी आवश्यक नहीं समझा।यह उनकी चुनाव रैलियों के दौरान भी देखने को मिला परन्तु कांग्रेस इसे जानते हुए भी अनजान बने रहना चाहती है। महंगाई ,भ्रष्टाचार ,घोटालों की मार से जनता का दम निकल चुकी कांग्रेस सरकार को 4 राज्यो के चुनाव में जनता ने रसातल में पहुंचा दिया है। जनता के रोष को देखते हुए केंद्र सरकार को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों को भी अपने भविष्य का मंजर दिखायी देने लगा है ,इसीलिए एनसीपी के शरद पवार ,सपा और बसपा भी कांग्रेस के नेतृत्व को कोसने पर उतर आयी है। कांग्रेस के अंदर भी नेतृत्व के विरुद्ध बगावत के स्वर सुनायी पड़ सकते हैं। हो सकता है कांग्रेस अपनी करतूतों और गांधी परिवार की असफलता का ठीकरा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सिर फोड़ने का काम करे लेकिन यह तो साबित होता जा रहा है कि राहुल गांधी के दम पर कांग्रेस की नैया को डूबने से अब कोई नहीं बचा सकता। जनता अब नरेंदर मोदी को देश की कमान सौपने की ठान लगती है और इसकी आहट इन विधानसभा के चुनावों में जनता ने दे दी है ,लेकिन देश का मीडिया ,कांग्रेसी और तथाकथित धरमनिर्पेक्षता के झंडाबरदार इस आहट को सुनने के बावजूद खुद को और जनता को गुमराह करने की बेकार की कवायद में जुटे हुए हैं।देश से कांग्रेस और उसके साथी दलों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और मोदी के कदम तेजी से दिल्ली की सत्ता की ओर बढ़ते जा रहे हैं।
हम हमेशा यह शिकायत करते हैं कि हमारी बात सरकार नहीं सुनती या हमारा प्रतिनिधि हमारी तरफ ध्यान नहींदेता , ऐसा क्यों है ?इस पर भी विचार करें कि क्या हम अपने वोट को डालते हैं या मतदान के दिन को पिकनिक मनाने और छुट्टी की मौज़ -मस्ती में गुज़ार देते हैं ?अगर हम यह चाहते हैं कि हमारी भी सरकार में भागीदारी हो और हमारी सुनवाई भी हो तो हमें अपने वोट को जरूर डालना चाहिए। अपने मान -सम्मान ,स्वाभिमान ,अस्तित्व और राष्ट्र कि रक्षा करने में सक्षम व्यक्ति /दल को अपना मत देकर अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
आखिर बीजेपी 2014 में होनेवाले लोकसभा चुनावों में नरेंदर मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने पर सहमत हो गई है और उसके दोनों सहयोगी दलों -शिवसेना -अकाली दल भी सहमत हो गए हैं। इस तरह से अब एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होगें और इसका औपचारिक ऐलान शाम को कर दिया जायेगा। नरेंदर मोदी को लेकर पूरे देश में ऐसा माहौल बन चूका है कि अब उनको रोक पाना किसी भी के बस की बात नहीं रही। देश में बढती महंगाई ,साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आज जनता मोदी को सबसे सक्षम और योग्य नेता मानती है। मोदी के नेतृत्व भारत विश्व में अपनी साख और शक्ति का डंका बजाएगा ,ऐसी हमारी कामना ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है। मोदी देश को विकास की राह पर ले लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। देश में अलगाववादी और आतंकवादी ताकतों को कुचलने का पुन्य कार्य करके आम आदमी को शांति और सुरक्षित वातावरण भी मिल पायेगा। अब देश के उन लोगों को भी अधिक से अधिक बहुमत मोदी को देने की जिम्मेदारी निभानी होगी जो चुनाव के दिन वोट डालते नहीं हैं और बाद में सरकार को कोसते रहते हैं। आओ हम सब अपनी और अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा के लिए और देश के उज्जवल भविष्य ,सुरक्षा ,एकता -अखंडता और मजबूती के लिए मोदी को अपनी किस्मत की बागडोर सौंपने का संकल्प लें। क्या यह लोग शांति और प्रेम की भाषा को समझेंगे ? |
आज मुसलमानों के छोड़कर सभी अन्य धर्मों को मानने वाले लोगों में 2 या 3 बच्चों को ही पैदा करने की परम्परा चल रही है। इसके पीछे इन लोगों की सोच है कि महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में कम संतान होने से वह अपने परिवार का भरण -पोषण ठीक तरह से कर पाएंगे और अपने बच्चों को भी अच्छी शिक्षा देकर उनका भविष्य उज्जवल कर पाएंगे। इसके उलट मुसलमान अधिक संतान को पैदा करके अपनी और देश की तरक्की को रोकने के मिशन में लगे हुए हैं।इनके धार्मिक नेता भी इनको यही समझाने में कामयाब हो चुके हैं कि संतान अल्ला की देन है और इनको पैदा होने से रोकना अल्ला के आदेश की तोहीन है। इसके साथ ही आबादी बढ़ाने के पीछे यह मानसिकता भी काम कर रही है कि अगर उनकी संख्या अधिक होगी तो भारत पर उनका ही इस्लामिक राज कायम हो जायेगा।इसी कारण मेवात के इलाके में आज भी कई मुसलमानों के 15 से 20 बच्चे भी पाए जा रहे हैं। अधिक संतान होने की वजह से न तो उनका भरण -पोषण ठीक तरह से होता है और न ही उनको शिक्षा भी मिल पाती है। यही अशिक्षा अधिकांश लोगों को अपराध और अन्य असमाजिक कार्यों की ओर धकेल रही है। परिवार -नियोजन को न अपनाकर मुसलमान अपने पिछड़ेपन को तो आमंत्रित कर ही रहे हैं साथ ही समाज और देश की तरक्की की रफ़्तार को भी रोकने में लगे हुए हैं। कुछ माह पहले ही राजस्थान के अलवर जिले के एक गाँव में एक मुसलमान मेरे पास अपनी ओल्ड ऐज पेंशन की समस्या को लेकर आया। इसकी हालत बिलकुल दरिद्र थी और उसकी आयु 70 वर्ष थी।उसने तीन विवाह किये और अब उसके 9 लड़के और 3 लड़कियां हैं। मजेदार बात यह है कि सबसे छोटा लड़का सिर्फ ढाई माह का है।जब मैंने उससे सवाल किया कि इतनी गरीबी में इतने बच्चे क्यों ?तो उसका जवाब था कि साहब यह अल्ला की देन है।मेरे यह कहने पर कि अब उसकी अगली संतान कब होगी ?तो वह बोला कि यह तो अल्ला ही बता सकता है। यह सोच ही है मुसलमानों के पिछड़ेपन का कारण जो न तो किसी सरकारी योजना के लाभ और न ही उनको आरक्षण देने से समाप्त हो सकता है। ऐसी सोचवालों को अधिक संतान को पैदा करके कई लाभ स्वत ही मिल जाते हैं जैसे -![]() |
पहले आबादी बढ़ाना और फिर पिछड़ेपन का रोना |
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| देश की जनता में सबसे अधिक असरदार नेता |
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| जनता में बे -असरदार नेता |