जांदा होया दस न गया चिट्ठी केडे वतना वल पावां
राहियां कोलों पुछदी फिरां मैं सजणा दा सर नावां।
बिछड़ गयां दियां तांघां रखियां, चार-चुफेरे ढूंढन अखियाँ
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क्या किसी भी देशभक्त से यह उम्मीद की जा सकती है कि वो अपने देश के विरुद्ध नारे लगानेवाले ,देश की संसद पर हमले के दोषी आतंकवादी के जिंदाबाद करनेवाले और देश की बर्बादी तक जंग लड़ने की भावना दर्शाने वालों का समर्थन करे ?अगर कोई भी व्यक्ति या मिडिया संस्थान ऐसा करे तो उसको कैसे देशभक्त कहा जा सकता है ?इस बात का निर्णय कौन करेगा कि ऐसा कृत्य करनेवाला नागरिक देशभक्त नहीं है ?अपने देश के विरुद्ध ऐसी भावना रखनेवाले व्यक्ति को क्या खुद इस बात का निर्णय करने का अधिकार है कि वह इस दुर्भावना को प्रदर्शित करने के बावजूद भी देशभक्त है ?क्या कोई आरोपी खुद ही अपने को आरोप मुक्त कहकर देश के लोगों को गुमराह कर सकता है ? इस बात का निर्णय देश की न्यायपालिका ही कर सकती है और कर भी रही है। देश की बर्बादी और उसको खंड -खंड करने तक जंग लड़ने वाले छात्रों को या किसी अन्य के विरुद्ध प्रशासन की क़ानूनी कार्रवाई को अनुचित कैसे कहा जा सकता है ?देशद्रोह के पाप को अभिव्यक्ति की आज़ादी का नाम देकर कैसे उचित ठहराया जा सकता है? लेकिन यह सब भारत के अंदर किया जा रहा है और इसको करने में देश के कई कथित बड़े राजनेता -राहुल गांधी -दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल -वामपंथी दलों के नेताओं सहित कई विरोधी दल के नेता और खुद को बड़ा पत्रकार मानने वाले लोग भी करने में लगे हुए हैं।अफजल गुरु देश की संसद पर हुए हमले का दोषी था और उसको न्यायालय ने फांसी की सज़ा दी थी और उसको यूपीए सरकार के कार्यकाल में फांसी पर टांग भी दिया गया था। अब कांग्रेस के नेता उसकी फांसी पर सवाल उठाकर न्यायपालिका की निष्पक्षता पर भी संदेह पैदा करके कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं। अफसोसजनक बात यह है कि सत्ता छिन जाने के बाद से ही कांग्रेस बुरी तरह से बौखलाई हुई है और ऐसी बौखलाहट में देश के विरुद्ध नारे लगानेवाले देशद्रोहियों और आतंकवादियों की पैरवी करने की नीचता पर उतर आई है। एक ओर तो राहुल गांधी जेएनयू में भारत विरोधी नारे और भारत के टुकड़े -टुकड़े करनेवालों की हिमायत करने जेएनयू परिसर में पहुँच जाते हैं दूसरी ओर भारत की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करनेवाले जवानों के परिवारों के आंसू पोंछने की जरूरत नहीं समझते। राहुल गांधी की यह कौनसी देशभक्ति है ? वह कहते हैं कि देशभक्ति उनके खून में है लेकिन वो हिमायत देश से द्रोह करनेवालों की कर रहे क्यों ? अगर कोई देशद्रोहियों का समर्थन भी करे और खुद को देश के युवाओं के दिलों की धड़कन भी बताए तो उसे क्या समझा जाये ? उनका यह कृत्य किसी भी तरह से उनको देशभक्त साबित नहीं करता। ऐसा कौनसा खून है जो उनकी रगों में हिलोरे मारकर उन्हें देशद्रोहियों का समर्थन करने के लिए बेचैन किये हुए है ? उनका यह कहना कि उन्हें किसी से देशभक्ति के प्रमाणपत्र लेने की जरुरत नहीं है कितनी बचकाना बात है। क्या ऐसे ऐसे व्यक्ति को देशभक्ति का प्रमाणपत्र मिल सकता है जो देशद्रोह के आरोपियों का समर्थन करता हो और अपनी रगों में देशभक्ति के खून होने का दावा भी करता हो ?अपने नापाक इरादे के साथ देशद्रोह के आरोपियों और आतंकवादी अफजल गुरु के समर्थन में पहले सड़क पर और अब देश की संसद में शोर -शराबा करनेवाले नेताओं के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए।देशद्रोहियों और आतंकवादियों के पक्ष में आवाज़ उठाने वाले इन नेताओं को संसद से निकालकर बाहर कर देना चाहिए बेशक वो किसी भी सदन के सदस्य हों या किसी भी पार्टी से संबंध रखते हों। यह लोग देश के साथ तो द्रोह कर ही रहे हैं साथ ही अफजल गुरु की फांसी पर भी सवाल उठाकर देश के सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना कर रहे हैं। देश की संसद हो चाहे कोई भी अन्य स्थानीय निकाय का सदन सभी इस देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था के मंदिर हैं उनमें बैठकर किसी भी सदस्य को भारत के स्वाभिमान पर चोट करने की छूट नहीं दी जा सकती। अगर कोई भी भारत के विरुद्ध जहर उगलने वालों की वकालत करता तो वो भी उसी दंड का भागी होना चाहिए जो एक देशद्रोही को मिलता है। कांग्रेस के लोग जिस तरह से जेएनयू कांड के देशद्रोह के आरोपियों को निर्दोष बताकर उनको बचाने का षड्यंत्र कर रहे हैं वो सीधे -सीधे देश के साथ गद्दारी है और कोई भी गद्दार सज़ा से बच नहीं सकता। [अश्विनी भाटिया ]भी करने में
हरियाणा की स्थिति आर्मी जाने के बावजूद सामान्य नहीं हो पा रही। बताया जा रहा है कि आर्मी मूकदर्शक बनी हुयी है और दंगाई बेखौंफ होकर अपनी मनमानी कर रहे हैं। रोहतक जिले के हालात बहुत ही गंभीर बने हुए हैं। यहां गैर जाटों को अराजक तत्व चुन -चुनकर अपनी हिंसा का शिकार बना रहे हैं। दंगाइयों द्वारा स्थिति इतनी भयावह बना दी गई है कि यहां के लोग आर्मी की उपस्थिति के बावजूद अपने को असुरक्षित मान रहे हैं और दहशत के साये में जीने मजबूर हैं। कहा यह जा रहा है कि कोई अदृश्य केंद्रीय प्रशासनिकशक्ति आर्मी को ऐक्शन लेने से रोके हुए है । कहा तो यहां तक जा रहा है कि सीएम खट्टर के आदेशों के बावजूद रोहतक के डीसी को आर्मी के दंगाई के विरुद्ध ऐक्शन लेने से केंद्रीय गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारी रोके हुए हैं। अगर यह बात सत्य है तो यह बहुत बड़ी राजनीती हो रही है जो वोटों की खातिर एक समुदाय को दूसरे समुदाय से लूटपाट करने और हिंसा की छूट प्रदान किये हुए है। इस तरह से एक ओर सीएम खट्टर चाहते हुए भी हिंसा पर काबू नहीं कर पा रहे और दूसरी ओर अपने समुदाय पंजाबियों की नज़र में भी नकारा साबित हो जायेंगे। यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते हरियाणा के सीएम की कुर्सी पर बैठे श्री मनोहरलाल खट्टर को असफल करने की राजनैतिक साज़िश। सूत्रों का कहना तो यह भी है कि हरियाणा के भाजपा के जाट नेता भी इस हिंसा को परदे के पीछे से पूरा आशीर्वाद प्रदान किये हुए हैं क्योंकि उन्हें भी सीएम की कुर्सी पर किसी जाट के न होने की छटपटाहट खाए जा रही है और इसीलिए सीएम मनोहर लाल खट्टर को एक नाकारा प्रशासक साबित करके कुर्सी से चलता करने राजनैतिक साज़िश।सूत्रों की माने तो इस साजिश में अपने को पाक -साफ दर्शाने के तहत ही कैप्टन अभिमन्यु के घर पर आगजनी करवाई गयी है। दूसरी और हरियाणा को आग के हवाले करवाकर कांग्रेस के पूर्व सीएम हुड्डा दिल्ली में जंतर -मंतर पर आकर भूख हड़ताल पर बैठ कर अपने को शांति का मसीहा बनाने की कवायद में जुट गए हैं जबकि रोहतक उनका अपना गृह जिला है और उनका घर भी वहां है लेकिन किसी भी दंगाई ने उस तरफ टेडी नज़र करने की कोशिश नहीं की। हकीकत तो यह है कि हरियाणा के सभी दलों के जाट नेता इस हालात में बराबर के और भागीदार हैं और खुद को भविष्य में होनेवाली किसी जाँच से बचने की रणनीति। जो भी हो लेकिन अगर हरियाणा की इस भयानक स्थिति पर शीघ्र ही नियंत्रण नहीं किया तो में यहां के हालात बहुत ही विस्फोटक हो जायेंगे तब उनका नियंत्रित करना बिलकुल आसान नही होगा।
कर्तव्य बनता ही कि वो एकजुट होकर देशद्रोहियों के मंसूबों पर पूरी ताकत से प्रहार करे और अपने राष्ट्र की रक्षा करें। ऐसे दौर में जाट भाईओं के आरक्षण आंदोलन से कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व नाज़ायज़ लाभ उठाकर देश की शांति -व्यवस्था को खराब कर सकते हैं।हमारे जाट भाईओं ने हमेशा ही देश के लिए बढ़चढ़कर कुर्बानी की है और इस राष्ट्र को मजबूत करने में अपना खून -पसीना एक किया है। चाहे देश को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बनाना हो या सीमा पर दुश्मनों से देश को बचाना हो हर मोर्चे पर इन लोगों ने डटकर मुकाबला किया और देश का सम्मान बचाया। इस वीर जाति का हम सम्मान करते हैं और उनकी देशप्रेम की भावना को भी नत मस्तक हैं। उनके आरक्षण की मांग जायज़ हो सकती है पर यह समय आंदोलन का नहीं है क्योंकि देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें अपना सर उठा रही हैं और इनको कुचलना सरकार की और हम सब देशवासियों की भी पहली प्राथमिकता बनती है। आंदोलन तो बाद में भी किया जा सकता है क्योंकि अपनी जायज़ मांग रखने का अधिकार हम सभी को हमारे सविंधान से मिला हुआ है। इतिहास गवाह है कि जब भी भारत माँ के सम्मान को किसी आततायी या गद्दार ने ठेस पहुंचाने का दुस्साहस किया उसका जाट जाति के शूरवीरों ने आगे बढ़कर नामोनिशान मिटा दिया और अपना बलिदान देना भी अपना सौभाग्य ही माना। देश पर अपना बलिदान देनेवाले भारत माँ के वीर सपूतों को हमारा शत -शत नमन है। जाट आंदोलनकारी नेताओं से हम यह अनुरोध करते हैं कि भारत माँ के दामन को बचाने के लिए अपना बलिदान देनेवाले असंख्य वीर सपूतों की कुर्बानी को दिलो -दिमाग में रखते हुए इस संकट के समय में अपना आंदोलन वापिस ले लें। यही जाट बंधुयों की ओर से उन भारत बलिदानी पुत्रों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जय भारत माता की। जय भवानी।[अश्विनी भाटिया ]
भारत को अब और समय बर्बाद किये बिना आतंक की फैक्ट्री पाकिस्तान को सबक सीखा देना चाहिए क्योंकि अब एकमात्र यही विकल्प शेष है जिससे भारत की सीमाओं और बेकसूर नागरिकों की रक्षा की जा सकती है। भारत के नागरिकों की जान की कीमत पर हमें शांति नहीं चाहिए इस बात को हमारे शासकों को भी अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। पाकिस्तानी सरकार की हरकतों का जवाब भारत को अब पूरी ताकत से देना चाहिए ,क्योंकि इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान उस कुत्ते की तरह से है जिसकी दम 12 साल तक नलकी में रखी जाये फिर भी वह सीधी नहीं होनेवाली ? भारत की भूमि को छीनकर बने इस नापाक देश को जितना भी प्यार से समझा लो इसकी समझ में आनेवाला कुछ नहीं है।
सभी देशवासिओं को विजयदशमी पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। हम सब इस पर्व पर अपने आराध्य मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम के चरणों में अपना शत -2 नमन करते हैं। आइए हम भगवान राम के द्वारा स्थापित सिद्धांतों और दिखाए गए मार्ग पर चलकर अपने राष्ट्र और धर्म के सामने चुनौती के रूप में खड़ी आतताई शक्तियों के समूल विनाश की शपथ लें,ताकि मानवजाति को विनाश की गर्त में जाने से बचाया जा सके। हमारा यही संकल्प ही हमारे द्वारा अपने भगवान श्री राम के प्रति सच्ची आस्था और भक्ति का सूचक होगी। जय श्री राम। 
बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रिय जनतादल के लालूयादव ,नितीश कुमार ,समाजवादी के मुलायम सिंह और कांग्रेस के सोनिया - राहुल गांधी जैसे लोगों ने मिलकर महागठबंधन बनाया है। क्या यह महागठबंधन महाठगबंधन नहीं है ? जिस भानुमति के कुनबे में पशुओं का चारा खानेवाले लालू यादव जैसे चाराचोर , घोटालों के महानायक और सत्ता के बिना मछली की भांति छटपटा रहे सोनिया -राहुल , बिहार में कुशाशन के प्रणेता सत्ता लोभी नितीश कुमार जो सत्ता की लोलुपता के लिए किसी से भी हाथ मिलाने से परहेज नहीं कर रहे और यूपी में अराजकता और गुंडाराज कायम रखनेवाले सपाई मुलायम सिंह एंड कम्पनी शामिल है , उस गठबंधन को महाठग बंधन क्यों नहीं कहा जाए ? इस गठबंधन में शामिल सभी लोगों का न तो कोई सिद्धांत है और न ही कोई स्पष्ट नीति है , इसलिए यह स्वार्थी लोगों का एक गिरोह है जो सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से भयभीत होकर अपने वर्चस्व को बचाने और सत्ता हथियाने का अंतिम प्रयास कर रहा है। और सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि इनके साथ आज के बड़े सबसे कथित ईमानदार नेता और स्वच्छ राजनीती के कथित पुरोधा अरविन्द केजरीवाल भी शामिल होकर बिहार की जनता को गुमराह करके ठगने का प्रयास कर रहे हैं।
पाकिस्तान के नेता और फौजी कमांडर बार - बार भारत को अपने परमाणु बम की धमकी देकर क्या युद्ध के लिए उकसा रहे हैं ? हमारा कहना तो यह है कि पाकिस्तान इस गीदड़ भभकी को देकर अपने अंत को निमंत्रण दे रहा है। वास्तविकता यह है कि इस बार भारत -पाक युद्ध हुआ तो पाकिस्तान नामो -निशान दुनिया के नक़्शे से मिट जायेगा और उसका नाम लेवा भी नहीं बचेगा। पाकिस्तानी नेताओं और सेना की यह गीदड़ भभकी का जवाब भारत अवश्य देगा ,लेकिन वह थोड़ा सा समय का इंतज़ार करें। इस बार का युद्ध पहले के युद्धों से भयंकर होगा जिसका स्पष्ट परिणाम निकलेगा।
दिल्ली [अश्विनी भाटिया ] क्या हमने कभी इस बात को सोचा कि अपनी आज़ादी [15 अगस्त ] के दिन को पाने के लिए कितने लोगों ने अपनी जान को कुर्बान किया है ? शायद यह हमारी कल्पना से भी दूर की बात है कि आज़ादी के लिए कितने अभागे लाखों गुमनाम लोगों,जिन्हे इतिहास के किसी पन्ने पर भी कोई जगह नहीं मिल पाई है , ने अपने प्राणो की आहुति दे दी थी और वो इस दिन को भी नहीं देख पाये । इसके साथ -२ एक बात और है कि जहां भारत -पाकिस्तान की हकूमत पानेवाले लीडर जशन मनाने में व्यस्त हो गए वहीं देश के करोड़ों अभागे लोगों को अपने घरों से बाहर होना पड़ा था , इन लोगों को आज़ादी के दिन की बजाए एक भयानक संकट ने घेर लिया और इनके सिर पर मौत अपना तांडव करने लगी। एक ही जमीन पर सदियों से रहनेवाले लोग मजहबी आधार [हिन्दू - मुसलमान ] पर हुक्मरानों द्वारा बाँट दिए गए और वह एक -दूसरे को कत्ल करने में जुट गए । इंसानियत ने शैतानियत का रूप धारण कर लिया और दोनों तरफ की सरकार हाथ पर हाथ रख कर बैठे रही। दोनों ओर मासूम बच्चों -बूढ़ों का खून पानी की तरह बहाया जाने लगा और वहशी दरिंदे अबोध लड़कियों और असहाय महिलाओं की इज्जत को तार - तार करने को अपना धर्म मानकर कुकर्म में जुट गए। 
क्या देश को कांग्रेस ने खोखला नहीं किया ? करोड़ो के घोटाले करनेवाली कांग्रेस की सरकार को जनता ने सत्ता से बाहर कर दिया,परन्तु सत्ता के बिना कांग्रेस की तड़प ''बिन पानी के मछली ''जैसी नहीं हो गई है ? जो सवाल सुषमा स्वराज ने आज संसद में सोनिया -राहुल गांधी से पूछे हैं, क्या उनका जवाब जनता को नहीं मिलना चाहिए ? क्या कांग्रेससंसद को बंधक बनाकर मोदी सरकार को मिले जनादेश का अपमान नहीं कर रही ? इस पर आपकी क्या राय है ?
शिवरात्रि की सभी देशवासिओं को हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर महादेव से हमारी यही कामना है कि वह भारत में मौजूद अंदरुनी व बाहरी आसुरी ताकतों का सर्वनाश करें। इसके साथ ही वो अपने अनुयायिओं को भी इतनी ताकत दे कि हम अपने राष्ट्र ,संस्कृति और धर्म के अस्तित्व को चुनौती दे रही आततायी ताकतों का मुंहतोड़ जवाब दें सकें। आदिदेव -देवों के देव -महादेव भगवान शिव से हमारी यही प्रार्थना है कि पुरे विश्व में सनातन धर्म का डंका बजता रहे। ॐ नमो शिवाय।
ऐसी खबरें मीडिया में आ रही हैं कि विश्व का सबसे खूंखार आतंकी संगठन आई एस का यह नापाक सपना है कि 2020 तक वह भारत सहित दुनिया के बहुत बड़े भाग पर अपना अधिपत्य कायम कर लेगा। इस्लामिक स्टेट पर एक नयी पुस्तक में दिए एक नक्शे के मुताबिक इस दुर्दांत आतंकी संगठन की योजना दुनिया के बड़े हिस्से में अगले पांच साल में अपना प्रभुत्व कायम करने की है जिसमें लगभग समूचा भारतीय उपमहाद्वीप शामिल है। भारत माँ के वीर सपूतों की रगों में जब तक खून की एक भी बून्द बाकी है तब तक आई एस 5 वर्ष क्या 1000 साल तक भी अपने इस नापाक इरादे को पूरा नहीं कर सकता। भारत भूमि इन नापाक लोगों की कब्रगाह बन जाएगी। परन्तु सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस पर भारत के कथित सेकुलर क्या अब भी यही कहेंगे कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता ? यह आईएस किस मजहब के नाम पर मानवता को लहूलुहान कर रहा है और ऐसा करने के पीछे आखिर उसका मकसद क्या है ?क्या धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देनेवाले और इस्लाम को प्रेम और भाईचारे का धर्म बतानेवाले इस्लाम के पैरोकार आईएस के इस इरादे के मुखालफत करने की कोई पहल करेंगे ? आईएस के नक्शे के मुताबिक इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और सीरिया (आईएसआईएस) की योजना मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका, अधिकांश भारतीय उप महाद्वीप और यूरोप के हिस्से पर अगले पांच साल के अंदर कब्जा कर अपना खिलाफत कायम करने की है।मिरर अखबार ने नक्शे का हवाला देते हुए बताया है कि खिलाफत..शरियत कानून द्वारा संचालित राज्य है जिसे आईएसआईएस कायम करना चाहता है। इसके दायरे में स्पेन से लेकर चीन तक को लाने का मंसूबा है। नक्शे के मुताबिक स्पेन, पुर्तगाल और फ्रांस के हिस्से को अरबी में ‘अंदालुस’ नाम दिया गया है जिस पर ‘मूरों’ ने आठवीं से 15 वीं सदी के बीच कब्जा किया था जबकि भारतीय उपमहाद्वीप को ‘खुरासान’ नाम दिया गया है।